Monday, 12 March 2018

बहुत हैं

यूँ दिल में अरमान बहुत हैं
अक्षत कम भगवान बहुत हैं


हासिल हो तो भी क्या होगा
फिर भी वो हैरान बहुत हैं


यहाँ मुखौटे का फैशन है
गुल हैं कम गुलदान बहुत हैं


शहर नया दस्तूर पुराना
दर हैं कम दरवान बहुत हैं


सच बोलोगे  दार मिलेगी
झूठ कहो अनुदान बहुत हैं


हैं हकीम बीमार आज खुद
नुस्खे भी नादान बहुत हैं


सुबह तुम्हारी मुट्ठी में है
दुनिया में इंसान बहुत हैं