कांटे दो मुश्किलें दो या बवाल दो मुझे
जो हो बहुत कठिन वही सवाल दो मुझे |
चलना नहीं आता है आँख मूंदकर मुझे
चाहे किसी जमात से निकाल दो मुझे |
जाऊँगा जहाँ मैं वहीँ जन्नत बनाऊंगा
चाहे कोई आकाश या पताल दो मुझे |
दीये नहीं टिकेंगे आँधियों के दौर में
हाथों में कोई अब नई मशाल दो मुझे |
मंदिर भी सलामत रहें मस्जिद भी हमारे
मैं चाहता हूँ देश बे-मिशाल दो मुझे |
वतन से मांगता हूँ मैं वतन के वास्ते
गांधी या भगतसिंह-सा कोई लाल दो मुझे |
जो हो बहुत कठिन वही सवाल दो मुझे |
चलना नहीं आता है आँख मूंदकर मुझे
चाहे किसी जमात से निकाल दो मुझे |
जाऊँगा जहाँ मैं वहीँ जन्नत बनाऊंगा
चाहे कोई आकाश या पताल दो मुझे |
दीये नहीं टिकेंगे आँधियों के दौर में
हाथों में कोई अब नई मशाल दो मुझे |
मंदिर भी सलामत रहें मस्जिद भी हमारे
मैं चाहता हूँ देश बे-मिशाल दो मुझे |
वतन से मांगता हूँ मैं वतन के वास्ते
गांधी या भगतसिंह-सा कोई लाल दो मुझे |
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