Thursday, 14 June 2012

शौक है मुझे

         
     गजल          
            सुनने का सुनाने का बड़ा शौक है मुझे
           बचपन से ही गाने का बड़ा शौक है मुझे |




         शब्दों का नशा है किसी नशे से कम नहीं
          पीने का पिलाने का बड़ा शौक है मुझे |




          जब रूठता है कोई आता है मजा और
          रूठे को मनाने का बड़ा शौक है मुझे |




         आंधी मे उड़ गया हो किसी का भी अगर घर
         उस घर को बसाने का बड़ा शौक है मुझे |




        अँधेरे में रहे कोई अच्छा नहीं लगता
        दीया भी जलाने का बड़ा शौक है मुझे |




         गिरने से बच गया हूँ मैं कुएँ में कई बार
         औरों को बचाने का बड़ा शौक है मुझे |

 ( गजल संग्रह 'तिरंगे के लिए ' मे  1997  मे  प्रकाशित )

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