स्वीकार है
अपनी इच्छाओं का ही विस्तार है
जिंदगी जैसी भी है स्वीकार है |
दीखता है जो हमारे सामने
यह तो अपना ही रचा संसार है |
एक पत्ता सूख डाली से गिरा
और एक आने को भी तैयार है |
है दीया आनंद फूलों ने यहाँ
पत्थरों ने भी किया उपकार है |
चाहकर भी कुछ न दे पाया तुझे
मुझ पे भी मेरा कहाँ अधिकार है |
जिस चिकित्सक ने मुझे चंगा किया
वह भला क्यों आजकल बीमार है |
लोग जो हैं स्वार्थ में अंधे हुए
क्या नहीं उनका कोई उपचार है ?
अपनी इच्छाओं का ही विस्तार है
जिंदगी जैसी भी है स्वीकार है |
दीखता है जो हमारे सामने
यह तो अपना ही रचा संसार है |
एक पत्ता सूख डाली से गिरा
और एक आने को भी तैयार है |
है दीया आनंद फूलों ने यहाँ
पत्थरों ने भी किया उपकार है |
चाहकर भी कुछ न दे पाया तुझे
मुझ पे भी मेरा कहाँ अधिकार है |
जिस चिकित्सक ने मुझे चंगा किया
वह भला क्यों आजकल बीमार है |
लोग जो हैं स्वार्थ में अंधे हुए
क्या नहीं उनका कोई उपचार है ?
No comments:
Post a Comment