बहुत हैं
यूँ दिल में अरमान बहुत हैं
अक्षत कम भगवान बहुत हैं
हासिल हो तो भी क्या होगा
फिर भी वो हैरान बहुत हैं
यहाँ मुखौटे का फैशन है
गुल हैं कम गुलदान बहुत हैं
शहर नया दस्तूर पुराना
दर हैं कम दरवान बहुत हैं
सच बोलोगे दार मिलेगी
झूठ कहो अनुदान बहुत हैं
हैं हकीम बीमार आज खुद
नुस्खे भी नादान बहुत हैं
सुबह तुम्हारी मुट्ठी में है
दुनिया में इंसान बहुत हैं
यूँ दिल में अरमान बहुत हैं
अक्षत कम भगवान बहुत हैं
हासिल हो तो भी क्या होगा
फिर भी वो हैरान बहुत हैं
यहाँ मुखौटे का फैशन है
गुल हैं कम गुलदान बहुत हैं
शहर नया दस्तूर पुराना
दर हैं कम दरवान बहुत हैं
सच बोलोगे दार मिलेगी
झूठ कहो अनुदान बहुत हैं
हैं हकीम बीमार आज खुद
नुस्खे भी नादान बहुत हैं
सुबह तुम्हारी मुट्ठी में है
दुनिया में इंसान बहुत हैं