गजल
प्यार के दीए जलाओ मैं तुम्हारे साथ हूँ
तुम बुलाओ ना बुलाओ मैं तुम्हारे साथ हूँ
अनगिनत कांटें भरे हैं राह में मालूम है
राह काँटों में बनाओ मैं तुम्हारे साथ हूँ
आदमी के बीच दीवारें अभी भी हैं बहुत
तुम जो बुलडोजर चलाओ मैं तुम्हारे साथ हूँ
आदमी की दीनता को दूर करने के लिए
तुम अगर फसलें उगाओ मैं तुम्हारे साथ हूँ
शर्त मेरी एक है बस साथ चलने के लिए
'वन्दे मातरम् ' गुनगुनाओ मैं तुम्हारे साथ हूँ
( गजल संग्रह 'तिरंगे के लिए ' मे 1997 मे प्रकाशित )
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