गजल
जिन्दगी को जब सही मकसद मिलेंगे
रास्तों में अनगिनत बरगद मिलेंगे
आयेगा, जायेगा, फिर आयेगा मौसम
तुम सफर में हो तुम्हें रहबर मिलेंगे
दीखती जो सामने मंजिल नहीं है
सरहदों के पार भी सरहद मिलेंगे
रास्ते मुझसे लिपट जाएंगे खुद ही
क्या पता ऐसे भी कुछ अवसर मिलेंगे
तुम जगो, देखो, तो वो है पास तेरे
मंदिरों में हर जगह पत्थर मिलेंगे
( अलीगढ से प्रकाशित पत्रिका 'जर्जर कश्ती ' के अगस्त 1998 अंक में प्रकाशित )
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