गजल
तन गोरेे मन काले हैं
ये ही ऊपर वाले हैं
लोकतंत्र मजबूत हुआ
लूट रहे घरवाले हैं
चोर घुसे घर के अन्दर
डरे हुए घरवाले हैं
खड़े रहो ये सोएंगे
मन्त्रीजी के साले हैं
आग सुलगती है अन्दर
दरवाजे पर ताले हैं
रो कर जन गण मन गाते
ऐसे भी दिलवाले हैं
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