Thursday, 28 October 2021

तन गोरे मन काले हैं

           गजल                 


तन   गोरेे  मन   काले  हैं 

ये   ही    ऊपर   वाले   हैं 


लोकतंत्र    मजबूत    हुआ 

लूट    रहे   घरवाले   हैं 


चोर  घुसे  घर के  अन्दर 

डरे   हुए   घरवाले   हैं 


खड़े   रहो   ये   सोएंगे 

मन्त्रीजी   के   साले  हैं 


आग  सुलगती है अन्दर 

दरवाजे   पर   ताले   हैं 


रो कर  जन  गण मन गाते 

ऐसे  भी   दिलवाले   हैं 

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