Friday, 29 October 2021

करो प्रेम की बात

                                   करो प्रेम की बात 


करो प्रेम की बात , करो मत बैर जगाने वाली 

करो बात मत इस उपवन में आग लगाने वाली |

यह अपना संसार निराला उपवन-सा, मधुवन-सा 

यहाँ कहां है जगह घृणा का , ईर्ष्या और जलन का 

भूल-चूक   लेनी-देनी  तो   होती   ही  रहती   है 

सुनो आम की बगिया में ये कोयल क्या कहती है 

गीतों में ही छिपी हुई है तन-मन की खुशियाली 

करो बात मत इस उपवन में आग लगाने वाली |

तुम गुलाब के पास खड़े हो कांटे जोड़ रहे हो 

अभी निआरो इन फूलों को,मुंह क्यों मोड़ रहे हो 

झड जाएंगे बात सत्य है पर इतना क्या कम है 

हर लें मन की पीड़ा पल में इतना इनमें दम है 

चलो बुलाते हैं ये पौधे और इनकी हरियाली

 करो बात मत इस उपवन में आग लगाने वाली |

उपवन है यह देश हमारा प्यारा हिन्दुस्तान 

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई सब हैं फूल समान 

अंधियारा कम हो धरती पर फैले और प्रकाश 

तुम से हो तों तुम भी थोडा भर दो और प्रकाश 

भरो बात बैरी मन में भी मधु बरसाने वाली 

करो बात मत इस उपवन में आग लगाने वाली |

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