Thursday, 28 October 2021

सभ्यता बन रही यंत्रणा

                                                   गीत 


आओ बैठ कुछ करें मंत्रणा 

सभ्यता बन रही यंत्रणा  |


सारे परिणाम ऐसे हैं फिक्स हो गये 

अनुबंध-प्रतिबन्ध सभी मिक्स हो गये 

 आज है पवित्र मात्र बंचना |


  स्वतंत्रता की ऐसी ही आंधियां चलीं 

अंधरे मे जैसे हैं लाठियाँ चलीं 

अब कौन दे किसे सांत्वना |


संबंधों का आज  चीड-फाड़ हो गया 

सम्वेदना का तंतु तार-तार हो गया 

अभिशाप बन गयी याचना |


मुट्ठियों में आज कुछ चित्र हैं बचे 

चलो ढूँढ़ते हैं कौन-कहां मित्र हैं बचे 

चलो साध्य की करें साधना 

सभ्यता न बने यंत्रणा |




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