Thursday, 28 October 2021

बाबा तेरी रचना

                                                             गीत 


जन -जीवन से क्रान्ति-पुष्प  को कभी नहीं झड़ने देगी 

बाबा तेरी रचना तुझको कभी नहीं मरने देगी |


तुमने हल और फाल बनाया कविता का 

खुरपी और कुदाल बनाया कविता का 

अंधरे में जीते लोगों की खातिर 

बोरिया और पुआल बनाया कविता का 


नई पीढियां इस मशाल को कभी नहीं बुझने देगी 

बाबा तेरी रचना तुझको कभी नहीं मरने देगी |


बात पते की' बाबा बटेसर नाथ' बताएंगे 

'पारो' 'बलचनमा' 'दुखमोचन' याद दिलाएंगे 

'नई पौध' और 'बरुण के बेटे' आगे आएँगे 

सभी पुरानी जूतियों का कोरस गाएंगे 

'हजार-हजार बाहों बाली'  हमें नहीं डरने देगी 

बाबा तेरी रचना तुझको कभी नहीं मरने देगी |


यह जो है संसार तुम्हारी रचना का 

यह जो है संस्कार तुम्हारी रचना का 

यह जो है ओंकार तुम्हारी रचना का 

यह जो है जयकार तुम्हारी रचना का 


कभी कलम के सौदागर की दाल नहीं गलने देगी 

बाबा तेरी रचना तुझको कभी नहीं मरने देगी |



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