Monday, 25 October 2021

याद आने के लिए

     गजल 


क्षुद्रता  का  है  घना  जंगल  उगा  

याद आने के लिए अब क्या बचा 


क्या पता किस हाल में कुंती है अब

जिसने मुझको था कभी सूरज कहा 


मांगता है भीख वो जो दर -ब -दर 

उसके  घर  मेहमान  हूँ मैं भी रहा 


उनकी  नजरों में  अभी  चींटी हूँ मैं 

जिनकी खातिर मैं कभी सीढ़ी बना 


झोंपड़ी   पर  फेंक   चिंगारी  हुजूर

पूछते  है  कल  यहाँ था  क्या हुआ 


(अलीगढ से प्रकाशित पत्रिका 'जर्जर कश्ती' के अगस्त  1998  अंक में प्रकाशित )

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