Saturday, 30 October 2021

मेरा मन

   मेरा मन  


काजल की कोठरी में मैं

और मेरे साथ मेरा मन |

 

अनगिनत मछलियाँ और कुछ मछेरे

चल रहे हैं साथ-साथ साँझ और सबेरे

मछलियों की कोठरी में मैं

और मेरे साथ मेरा मन |

 

एक ओर पर्वत और एक ओर कूआं

नजर जिधर जाय उधर धूआं-ही-धूआं 

धूएं के आर-पार मैं

और मेरे साथ मेरा मन |

 

मूंद लीं जो आँखें तो नाच उठे कोयल

नाच उठे भौंरे और खिल गए फूल

 

फूलों की टोकरी मे मैं

और मेरे साथ मेरा मन |

 

(   प्रकाशित : अमृत सन्देश, दीपोत्सव अंक 1995  )

 

                               

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