Thursday, 28 October 2021

दिनकर की कविता

  गीत 

कभी  हिमालय की छोटी-सी लगती है दिनकर की कविता 

पावन गंगाजल-सी कल-कल बहती है दिनकर की कविता |


श्री कृष्ण के चक्र-सुदर्शन -सी लगती  दिनकर की कविता 

शंकर के डमरू-सी डिम-डिम बजती  है दिनकर की कविता |


ब्रह्मा के सुनहले सृष्टि की चर्चा है  दिनकर की कविता

पुरुष   के ऊपर फूलों की  बर्षा   है दिनकर की कविता |


जग की सोयी मानवता को जगा रही दिनकर की कविता 

कंटक-पथ को फूलों से है सजा  रही  दिनकर की कविता |


मानवता का विजय-गान ही गाती  है दिनकर की कविता 

हमें   तिरंगे के  समान  ही  भाती  है  दिनकर की कविता |



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