Tuesday, 26 October 2021

रात और दिन

                  रात और दिन  (  लघुकथा )


उसने गालियाँ  दीं |

उसने नाक में दांत गड़ा दिया |

उसने बाल पकड़कर  जमीन पर गिरा दिया |

उसने स्टूल फेंका |


सबेरे उसने स्टोव जलाया | उसने पानी चढ़ा दिया |

उसने चाय-पत्ती डाली| | उसने दूध गर्म किया |

उसने  चीनी डाल दी | उसने चाय छान ली |

दोनों ने साथ-साथ चाय पी |

'हरी सब्जी तों नहीं है ?'  उसने पूछा  |

'आलू है न !'

'फिर चोखा ही बना डालो  |' उसने कहा |

दोनों ने एक ही थाली में खाना खाया |

दोनों सो गये |

शाम में दोनों ने मेक-अप किया |

अच्छे-अच्छे कपड़े पहने |

उसने उसकी टाई ठीक की |

उसने उसका आँचल ठीक किया |

दोनों साथ-साथ बाजार चले |

रास्ते में वो मिल गया |

'अरे ! माथे पर निशान कैसे हो गया ?'

' रात में .....वो.....लाइन कट गयी थी | बाथ-रूम से आ रहा था | स्टूल पर गिर गया  |

अच्छा, कभी डेरे पर भी आओ |'

'जरूर आऊंगा |'

दोनों ने मुस्कुराकर नमस्ते की |


( कहानी-लेखन महाविद्यालय,अम्बाला छावनी से प्रकाशित पत्रिका 'शुभ तारिका ' के                                    नवम्बर-दिसम्बर 1996 अंक में प्रकाशित  )



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